Friday, May 29, 2020

Ajib si, Anokhi si hu.

Sometime it's hard to find yourself in this busy life shedule. We forget ourselves in finding ourselves, making name and fame. It's hard to accept but accept yourself as you are. 

" Kuchh kehte hai AJIB-si hu,
Kuchh kehte hai ANOKHI-si hu,
Ish Ajib-si, Anokhi-si ke bich, 
kahi GUM-si hu.
Kabhi APNO-si hu,
Kabhi PARAYON-si hu,
Ish Apno-si aur Parayon-si ke bich, 
Main KHUD-si hu.
Jindgi ke har mod pe,
Ek NAI PEHCHAN-si hu,
Bite kal aur aane wale kal ke bich ki,
ek AAJ-si hu,
Ankahe, Ansune Alfaaz ke bich ki
Ek AAWAJ-si hu. "

May these lines make you guys feel comfort and let you think for yourself for a while. 

Thursday, May 28, 2020

Incomparable Love

Mother's love is just incomparable. She gives her whole life to its family, children, husband, and to so many relations. God's love is so wonderful, but a mother's love is so satisfying and so fulfilling. Here I represent some words relatable to unconditional mother's love.

" Ma teri tulana karu me kisse?
Khuda khud tere pyar ko tarse.
Koi murat ko pujane jaye kese? 
Jab khuda khud tujhme base. "

Never compare a mother's love or never disrespect her. It's the biggest sin anyone does.


Sunday, May 24, 2020

और वही खिलखिलाता बचपन!

हम सब बडे तो हो जाते है। बचपन में बडे होने की चाहत जो होती है, वो पुरी तो हो जाती है, मगर बचपन की वो मासूमियत, वो चंचलपना को छोड कर हम बडे होते है और खुद को ही कही खो देते है।

हाय रे! वो चंचल-सी हंसी,
उर्रफ! वो बिना वजह की खिलखिलाहट,
ना आने वाले कल की फिक्र,
ना ही बीते कल का गम़।
एक छोटा-सा परिवार,
वो छोटी-छोटी खुशिंया,
वो खिलखिलाते हम़,
और खिलखिलाता बचपऩ।
कहां गया वो बचपन?
जहां ना थे गिले-सिकवे,
ना ही थे बेर, ना ही थे गम़,
थे बस कुछ गिने खिलौने,
कुछ गिने यार,
वही खिलखिलाते हम़,
और वही खिलखिलाता बचपऩ।

After reading this hope many of you will get to remember your childhood. Best thing about Being born is we get to live as child. Unforgettable memories of many person belongs to their childhood. 
"बच्चे मन के सच्चे", All time memorable song and memory belongs to this.

Let me know your childhood memory through comment.

Friday, May 22, 2020

Dear Papa😎

जो पापा आपसे कभी बोल ना पाई, आज वो ईधर जता रही।
पापा!
घर में सबसे बडे 🤠,
सब इनसे डरे 😐।
बाहर से सख्त बडे 🤪,
अन्दर से प्यार भी खुब करे 😍।
दिन भर खुद को धूप में करे खडे 😔🤯,
बस हमारी एक मुसकान को करे 🤗।
मा के गुनगान तो सबही  करे 🙄,
पिता के त्याग, मेहनत को कैसे भूल जाया करे ☹️।

Papa I love you very much. Dear lord, yes you are the strong and take care of everyone. But please don't mind, my papa is stronger.

हिम्मत़।

जीवन में कई ऐसे मोड आते है जब हम खुद को अकेला, थका और हारा हुआ पाते है। उस समय मां ही एसी व्यक्ति होती है जो हमारा होंसला बांधती है और हमारी हिंम्मत बनती है। तो ये कुछ बोल उस हिंम्मत के नाम।
सबने कहा तुझसे होगा नही,
उसने कहा तेरे सिवाय कोई कर सकेगा नही।
सब जब मतलब से साथ रहे
वो बस मेरी खुशीयों के लिए साथ रही।
हर पल मेरे साथ रही,
क्योंकी इस जहां के निर्दयीपना से वो खुब वाकीफ रही।
जन्नत कैसी होगी सोचा करती,
और उसने अपने दामन मे महसूस कराया।

अकेलापन, डर, हार सब उसकी गोद में सो जाते है। जब भी महसूस हो बस मां का आंचल थाम लो, सब अच्छा महसूस करोगे।



अनकहे अनसुने अल्फाज़!

अल्फाज़! कुछ भी बयां करने के लिए हम इनका सहारा लेते। ये कई तरह के एहसासों से घुली होती है। मगर कभी कभी कुछ अल्फाज़ अनकहे से, अनसुने से, समय के मारे, हमारे अन्दर ही हम दबा देते है।

यूं ही राह चलते शब्दों से मिल जाती हू,
फिर उन्हें अपने एहसासों से पीरों जाती हू।
जो उनसे ना बयां कर पाती हू,
वो कुछ अनकहे से अनसुने से अल्फाज खुद को ही सुनाए जाती हू।
कभी तो एक मोड आएगा,
जहा उनसे ये अनकहे अल्फाज बयां कर सकूंगी,
बस इसी उम्मीद में इन शब्दों से मिलती जाती हू,
और इन्हे एहसासों से पीरोंए जाती हू।
सही है या गलत,
अच्छे है या बुरे,
इन सब से ही परे,
बस उन अनकहे अल्फाजों को पीरोए ही जाती हू।

तो ये कुछ मेरे लिखें शब्दों का मायाजाल। उम्मीद है आप सभी को जरूर पसंद आएगें। 

Wednesday, May 13, 2020

ममता की छाया।

ये उन दिनों की बात है, जब मेरी बारहवी की बाॅड् परीक्षा थी और मैं Typhoid से पिडीत थी। उस बुरे हालात में जिस तरह से मां आपने मुझे संभाला था, उसे बयां करना मुश्किल है, मगर मैं यहा एक छोटी-सी कोशिश कर रही।

वो रोज, आंखें मिचती, अपनी आधी खुली आंखों से मेरे सो जाने की तस्सली करती। 
फिर जाके कही उन आधी नींद से जागी आंखों को सुकुन से सोने की इजाजत मिलती।
कही मुझे दर्द तो नही हो रहा, ये ख्याल आते ही फिर उन नींद भरी आंखों को तकलिफ देती।
मेरे उन घाओं की पीडा मुझसे ज्यादा उसे तकलीफ देती।
मगर कोई तो समझाओ मेरी इस भोली अम्मा को कि, 
हा! मुझे ये जख्मं तकलिफ तो देते है, 
मगर जब उसकी प्यार और ममता भरी गोद का सहारा मिलता,
मन मोह जाए एसे मिठे स्वर में जब वो लोरी गाके सुलाती,
अपने कठोर, मगर नाझुख हाथों से जब वो एक एक निवाला खिलाती,
तब इन जख्मों के एहसास में भी सुकुन की नींद आती।


NOTE for every Generation:  " Never leave your parents hand, even after reaching gretest level of maturity and greater age. Cause the magic you expect from the god, happens to you because of her blessings and wishes". 
The only person who can be compared or can be given place of Lord are your parents. Respect them.

EE JINDGI!

Jindgi se kese gile sikwe. Wo to apno si rakhti hai. Hasati hai, rulati hai. Kai tariko se hame jina sikhati hai. Jindagi jine k...