ये उन दिनों की बात है, जब मेरी बारहवी की बाॅड् परीक्षा थी और मैं Typhoid से पिडीत थी। उस बुरे हालात में जिस तरह से मां आपने मुझे संभाला था, उसे बयां करना मुश्किल है, मगर मैं यहा एक छोटी-सी कोशिश कर रही।
फिर जाके कही उन आधी नींद से जागी आंखों को सुकुन से सोने की इजाजत मिलती।
कही मुझे दर्द तो नही हो रहा, ये ख्याल आते ही फिर उन नींद भरी आंखों को तकलिफ देती।
मेरे उन घाओं की पीडा मुझसे ज्यादा उसे तकलीफ देती।
मगर कोई तो समझाओ मेरी इस भोली अम्मा को कि,
हा! मुझे ये जख्मं तकलिफ तो देते है,
मगर जब उसकी प्यार और ममता भरी गोद का सहारा मिलता,
मन मोह जाए एसे मिठे स्वर में जब वो लोरी गाके सुलाती,
अपने कठोर, मगर नाझुख हाथों से जब वो एक एक निवाला खिलाती,
तब इन जख्मों के एहसास में भी सुकुन की नींद आती।
NOTE for every Generation: " Never leave your parents hand, even after reaching gretest level of maturity and greater age. Cause the magic you expect from the god, happens to you because of her blessings and wishes".
The only person who can be compared or can be given place of Lord are your parents. Respect them.
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